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जब शरीर का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, तो उसे बुखार कहा जाता है। यह अपने आप में कोई बीमारी नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि शरीर किसी संक्रमण या दूसरी स्वास्थ्य समस्या से मुकाबला कर रहा है। अधिकांश मामलों में बुखार वायरस या बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण की वजह से होता है। कई बार हल्का बुखार घर पर आराम, पर्याप्त पानी और सही देखभाल से ठीक हो जाता है, लेकिन इसकी वजह जानना भी उतना ही जरूरी है।
मौसम में बदलाव, वायरल संक्रमण, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और कई अन्य संक्रमणों के दौरान शरीर का तापमान बढ़ सकता है। हालांकि हर बार तापमान बढ़ने का मतलब गंभीर बीमारी नहीं होता। ऐसे में लोगों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि क्या 99°F भी बुखार माना जाता है और किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
क्या 99°F बुखार माना जाता है?
यह सबसे आम सवालों में से एक है।
सामान्यतः शरीर का तापमान 97°F से 99°F के बीच हो सकता है। यह हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। उम्र, दिन का समय, शारीरिक गतिविधि और तापमान मापने का तरीका (मुंह, कान या बगल) भी इसमें थोड़ा-बहुत फर्क ला सकते हैं।
इसी कारण 99°F को हर व्यक्ति के लिए बुखार नहीं माना जाता। कई लोगों के लिए यह सामान्य तापमान की ऊपरी सीमा हो सकती है।
लेकिन यदि आपका सामान्य तापमान हमेशा 97°F या 98°F के आसपास रहता है और अचानक 99°F के साथ शरीर दर्द, कमजोरी, ठंड लगना या कंपकंपी जैसे लक्षण दिखाई दें, या तापमान लगातार बढ़ रहा हो, तो यह संक्रमण की शुरुआती अवस्था का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में अपने स्वास्थ्य पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें।
बुखार केवल शरीर का तापमान बढ़ने तक सीमित नहीं होता। इसके साथ कई अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं, जैसे:
यदि बुखार के साथ त्वचा पर लाल चकत्ते, लगातार उल्टी, सांस लेने में परेशानी, भ्रम की स्थिति या तेज सिरदर्द हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
बुखार होने के सामान्य कारण
बुखार कई कारणों से हो सकता है, जिनमें शामिल हैं:
संक्रमण
संक्रमण के कारण होने वाले बुखार में शामिल हैं —
गैर-संक्रामक कारण
कुछ ऐसी स्थितियां भी हैं जिनमें बिना संक्रमण के बुखार आ सकता है, जैसे —
सिर्फ लक्षणों के आधार पर बीमारी का सही कारण जानना हमेशा संभव नहीं होता। इसलिए डॉक्टर आवश्यक होने पर जांच कराने की सलाह देते हैं।
अलग-अलग उम्र में बुखार के लक्षण
बुखार के लक्षण और उसकी गंभीरता हर उम्र में एक जैसी नहीं होती। नवजात शिशुओं, बच्चों, वयस्कों और बुजुर्गों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अलग तरह से काम करती है। इसलिए बुखार की पहचान और उपचार में उम्र का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
3 महीने से कम उम्र के शिशु
यदि 3 महीने से कम उम्र के शिशु का शरीर का तापमान 100.4°F (38°C) या उससे अधिक हो, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। इस उम्र में प्रतिरक्षा प्रणाली पूरी तरह विकसित नहीं होती, इसलिए संक्रमण तेजी से बढ़ सकता है।
ऐसे शिशुओं में लगातार रोना, दूध या खाना न पीना, अत्यधिक नींद आना, सुस्ती या रोते समय आंसू न आना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे किसी भी बुखार में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
बच्चे और वयस्क
बच्चों और स्वस्थ वयस्कों में 100.4°F (38°C) या उससे अधिक तापमान को बुखार माना जाता है।
इसके साथ ठंड लगना, पसीना आना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान और कमजोरी जैसे लक्षण हो सकते हैं।
यदि तापमान 103°F से अधिक हो जाए, बुखार तीन दिन से ज्यादा बना रहे या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। इस आयु वर्ग में निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) और संक्रमण की पहचान समय पर करना महत्वपूर्ण होता है।
65 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोग
बुजुर्गों में स्थिति थोड़ी अलग होती है। कई बार 99°F (37.2°C) या उससे अधिक तापमान भी संक्रमण का संकेत हो सकता है। उनमें भ्रम, कमजोरी, भूख कम लगना, सुस्ती या हल्का बुखार जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
उम्र बढ़ने के साथ प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया कमजोर हो जाती है, इसलिए गंभीर संक्रमण होने पर भी तेज बुखार हमेशा नहीं आता। यही कारण है कि बुजुर्गों में हल्का तापमान बढ़ना भी चिकित्सकीय जांच की आवश्यकता का संकेत हो सकता है। यदि बुखार के साथ भ्रम, अत्यधिक कमजोरी या अन्य असामान्य लक्षण हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
फीवर प्रोफाइल टेस्ट क्या होता है?
फीवर प्रोफाइल एक ऐसा डायग्नोस्टिक टेस्ट पैकेज होता है जिसमें कई जांचें शामिल होती हैं। इसका उद्देश्य बुखार की संभावित वजह का पता लगाने में डॉक्टर की मदद करना होता है, ताकि सही उपचार शुरू किया जा सके।
फीवर प्रोफाइल में आमतौर पर इसमें निम्नलिखित जांचें शामिल हो सकती हैं —
मरीज के लक्षण, मौसम, मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक जांच के आधार पर डॉक्टर जरूरत पड़ने पर कुछ अतिरिक्त टेस्ट भी लिख सकते हैं।
बुखार होने पर क्या करें?
यदि आपको बुखार है, तो घबराने की बजाय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें:
कब तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए?
निम्न स्थितियों में चिकित्सा सहायता लेने में देरी नहीं करनी चाहिए:
बुखार स्वयं कोई बीमारी नहीं बल्कि शरीर का एक संकेत है कि वह किसी संक्रमण या अन्य समस्या से लड़ रहा है। 99°F हर स्थिति में बुखार नहीं माना जाता, लेकिन यदि इसके साथ अन्य लक्षण मौजूद हों तो सावधानी बरतना जरूरी है। लगातार बुखार, कमजोरी या संक्रमण के संदेह की स्थिति में डॉक्टर की सलाह और आवश्यक लैब जांच समय पर करवाना सही निदान और उपचार में मदद करता है।
FAQs
1. क्या वायरल बुखार और बैक्टीरियल बुखार के लक्षण अलग-अलग होते हैं?
दोनों तरह के संक्रमण में बुखार, शरीर दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, केवल लक्षणों के आधार पर कारण की पहचान करना कठिन होता है कि संक्रमण वायरल है या बैक्टीरियल। सही निदान के लिए डॉक्टर की सलाह और आवश्यकता पड़ने पर लैब जांच कराना महत्वपूर्ण है।
2. बुखार होने पर तापमान कितनी बार जांचना चाहिए?
यदि बुखार है, तो हर 4–6 घंटे में या डॉक्टर के निर्देशानुसार शरीर का तापमान मापना उपयोगी होता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि बुखार बढ़ रहा है, कम हो रहा है या स्थिर है।
3. बुखार के दौरान किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए?
बुखार होने पर पर्याप्त आराम करें, खूब पानी और अन्य तरल पदार्थ पिएं, पौष्टिक भोजन लें और डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन न करें। यदि बुखार लंबे समय तक बना रहे या गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
4. बुखार कितने दिन रहने पर जांच करवानी चाहिए?
यदि बुखार 2–3 दिन से अधिक बना रहे, बार-बार लौटकर आए, या डेंगू, मलेरिया या टाइफाइड जैसे संक्रमण के लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से परामर्श लेकर आवश्यक जांच करवानी चाहिए।
Sources:
https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC8394829/
https://www.hopkinsmedicine.org/health/conditions-and-diseases/fever